पूछो !
- Jan 1, 2016
- 1 min read
चुप सा है वो खिला हुआ फूल

पूछो ! डाल ने कांटा तो नहीं चुभाया
खुसबू देना जैसे गया है भूल
पूछो ! किसी भँवरे ने तो नहीं सताया |
कुछ दिन पहले की लालिमा याद है मुझे
वो खिलखिलाते उसके पत्ते याद है मुझे
जिसे देख होंठो पर छलकती है हंसी
पूछो ! मुझे रुलाने को बहाना तो नहीं बनाया |
कुछ पल ही सही मुस्कान दो मुझे
मेरी आँखों के सारे अरमान दो मुझे
मैं नहीं भँवरा जो खोंजू दूसरा फूल
पूछो ! इससे पहले मैंने ऐसा तो नहीं पाया |
चुप सा वो खिला हुआ फूल
पूछो ! डाल ने कांटा तो नहीं चुभाया ||





Comments