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नयनों की बोली ...

  • Jan 1, 2016
  • 1 min read

ना जाने कैसी किश्ती में सवार ये नयनो की डोली

मूक बनी जाने कैसे करती है मनवा की बोली |

कैसे कैसे रूप सजती आँखें मधुमय ये मतवाली

श्रृंगार से कभी ये भरी हुई विरह में है कभी खाली |

प्रेम वर्षा इन नयनों की हल्की हल्की फुह्वारों सी

मन को शीतल कर देती है तन को लगती अंगारों सी |

कही प्रीत का धागा है बाँधा कही जोड़ी रिश्तों की डोरी

नयनों के नित प्रहार बिना नयनों की मस्ती है कोरी |

 
 
 

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